cla-web

In Stock

पर्यावरण विधि

530.00

EDITION: 7th Ed. (2026)
FORMAT: PAPERBACK
ISBN: 978-93-92140-69-3
LANGUAGE: HINDI
PAGES: 562
PUBLISHER CODE: TBH/25
CATEGORY: TEXTBOOKS HINDI, ENVIRONMENTAL LAW

EDITION: 7th Ed. (2026)
FORMAT: PAPERBACK
ISBN: 978-93-92140-69-3
LANGUAGE: HINDI
PAGES: 562
PUBLISHER CODE: TBH/25
CATEGORY: TEXTBOOKS HINDI, ENVIRONMENTAL LAW

Guarantee Safe & Secure Checkout

Description

डॉ. जे.जे.आर. उपाध्याय द्वारा लिखित पर्यावरण विधि पर्यावरण विधि के गतिशील विकास का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत करती है, जिसमें विकास और पारिस्थितिक संरक्षण के बीच प्रारंभिक संघर्षों से लेकर सतत विकास (Sustainable Development) को एक मार्गदर्शक सिद्धांत के रूप में स्वीकार किए जाने तक की प्रक्रिया का वर्णन किया गया है। यह पुस्तक भारत में पर्यावरणीय शासन को आकार देने वाले विधायी ढांचे, नीतिगत विकासों तथा महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णयों का व्यापक अवलोकन प्रदान करती है।

इसका संशोधित संस्करण हाल के संशोधनों तथा सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के महत्वपूर्ण निर्णयों को समाहित करता है। इसमें *पर्यावरण प्रतिपूरक शुल्क (Environmental Compensation Charges – ECC), स्वच्छ और सम्मानजनक पर्यावरण का अधिकार*, *ग्रीन पटाखे, तथा *समग्र वन्यजीव प्रबंधन योजनाएँ (Comprehensive Wildlife Management Plans) जैसे नए और उभरते हुए विषयों पर उपयोगी जानकारी दी गई है। साथ ही, इसमें राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 तथा अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 जैसे महत्वपूर्ण कानूनों का विस्तृत विश्लेषण भी प्रस्तुत किया गया है।

सरल, स्पष्ट और वर्णनात्मक शैली में लिखी गई यह पुस्तक सैद्धांतिक समझ और व्यावहारिक उपयोग के बीच संतुलन स्थापित करती है। यही कारण है कि यह विधि के विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, न्यायिक सेवा के अभ्यर्थियों, पर्यावरणविदों तथा नीति-निर्माताओं के लिए एक अत्यंत उपयोगी अध्ययन सामग्री के रूप में सिद्ध होती है।

\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\"एनवायर्नमेंटल लॉ\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\' (Environmental Law) भारत और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए विकसित कानूनी सिद्धांतों, नीतियों और न्यायिक प्रतिक्रियाओं का एक व्यापक और व्यवस्थित विवरण प्रदान करती है। यह पुस्तक ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, वैधानिक ढांचे और निर्णयज विधि (केस लॉ) विश्लेषण के बीच संतुलन बनाती है, जो इसे छात्रों, प्रतियोगी परीक्षा के उम्मीदवारों और कानूनी पेशेवरों के लिए एक मूल्यवान संसाधन बनाती है।

मुख्य विषय और विश्लेषण:
अवधारणा और वैश्विक जागरूकता: पुस्तक पर्यावरणीय अवधारणाओं के परिचय के साथ शुरू होती है, जिसमें जनसंख्या वृद्धि, औद्योगीकरण और शहरीकरण जैसे पर्यावरण क्षरण के कारणों की व्याख्या की गई है। यह पारिस्थितिक मुद्दों पर वैश्विक जागरूकता और अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों की भूमिका को भी रेखांकित करती है।

ऐतिहासिक और दार्शनिक जड़ें: प्राचीन भारतीय परंपराओं और धार्मिक दर्शनों (हिंदू, बौद्ध, जैन, सिख और इस्लाम) के माध्यम से पर्यावरण नैतिकता की गहरी जड़ों को दर्शाया गया है। इसके बाद, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पर्यावरण कानून के उद्भव और \\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\'पूर्ण दायित्व\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\' (Absolute Liability) जैसे सिद्धांतों के विकास का परीक्षण किया गया है।

संवैधानिक और वैधानिक ढांचा: पुस्तक का एक बड़ा हिस्सा भारत के संवैधानिक ढांचे पर केंद्रित है, जिसमें अनुच्छेद 21 के तहत स्वस्थ पर्यावरण के अधिकार की न्यायिक व्याख्या, राज्य के नीति निदेशक तत्व और मौलिक कर्तव्यों को शामिल किया गया है।

प्रमुख अधिनियमों का विश्लेषण: विधायी उपायों जैसे जल अधिनियम, 1974; वायु अधिनियम, 1981; और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 का विस्तार से विश्लेषण किया गया है। इसके साथ ही वनों, वन्यजीव संरक्षण, जैव विविधता और ध्वनि प्रदूषण पर विशेष कानूनों को भी शामिल किया गया है।

न्यायिक सक्रियता और महत्वपूर्ण सिद्धांत: पुस्तक पर्यावरणीय संरक्षण रणनीतियों, जैसे न्यायिक सक्रियता, जनहित याचिका (PIL) और चिपको आंदोलन जैसे सामाजिक आंदोलनों को कवर करती है। इसमें महत्वपूर्ण सिद्धांतों को स्पष्टता के साथ समझाया गया है:

सतत विकास (Sustainable Development)

सावधानी का सिद्धांत (Precautionary Principle)

प्रदूषक भुगतान सिद्धांत (Polluter Pays Principle)

विशिष्ट मुद्दे और ऐतिहासिक मामले: प्रदूषण नियंत्रण, खतरनाक अपशिष्ट प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता संरक्षण जैसे विशिष्ट मुद्दों को संबोधित किया गया है। भोपाल गैस त्रासदी, ओलियम गैस रिसाव और ताजमहल प्रदूषण मामले जैसे ऐतिहासिक संदर्भों के साथ न्यूसेंस, लापरवाही, और रिट क्षेत्राधिकार जैसे न्यायिक उपचारों पर गहराई से चर्चा की गई है।

निष्कर्ष:
एक स्पष्ट और व्यवस्थित शैली में लिखी गई यह पुस्तक पर्यावरण विज्ञान, कानून और नीति को व्यावहारिक केस विश्लेषण के साथ एकीकृत करती है। यह अकादमिक अध्ययन, न्यायिक परीक्षाओं की तैयारी और पर्यावरण शासन एवं मुकदमेबाजी में प्रभावी अभ्यास के लिए एक अनिवार्य संसाधन है।\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\"

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “पर्यावरण विधि”

Your email address will not be published. Required fields are marked *

पर्यावरण विधि
You're viewing: पर्यावरण विधि 530.00
Add to cart
Select the fields to be shown. Others will be hidden. Drag and drop to rearrange the order.
  • Image
  • SKU
  • Rating
  • Price
  • Stock
  • Availability
  • Add to cart
  • Description
  • Content
  • Weight
  • Dimensions
  • Additional information
Click outside to hide the comparison bar
Compare