cla-web

In Stock

साम्य, न्यास, न्यासवत् सम्बन्ध, बन्धक एवं विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम

Author:

425.00

EDITION: 8th Ed. (R/p 2023)
FORMAT: PAPERBACK
ISBN: 978-81-941659-8-9
LANGUAGE: HINDI
PAGES: 439
PUBLISHER CODE: TBH/27
CATEGORY: TEXTBOOKS HINDI, EQUITY, TRUST & MORTGAGE LAW

EDITION: 8th Ed. (R/p 2023)
FORMAT: PAPERBACK
ISBN: 978-81-941659-8-9
LANGUAGE: HINDI
PAGES: 439
PUBLISHER CODE: TBH/27
CATEGORY: TEXTBOOKS HINDI, EQUITY, TRUST & MORTGAGE LAW

Guarantee Safe & Secure Checkout

Description

“यह पुस्तक साम्या (Equity), न्यास (Trusts) और विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम, 1963 का एक विस्तृत और व्यवस्थित अध्ययन प्रदान करती है, जिसे ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, सैद्धांतिक आधारों और व्यावहारिक अनुप्रयोगों के साथ प्रस्तुत किया गया है। यह छात्रों, अभ्यर्थियों और पेशेवरों को कानून की इन शाखाओं के वैचारिक ढांचे और वैधानिक विकास को समझने में मदद करती है।

पुस्तक मुख्य रूप से तीन भागों में विभाजित है:

1. साम्या (Equity)
यह खंड साम्या के अर्थ, कार्यक्षेत्र और रोमन, अंग्रेजी एवं भारतीय कानूनी प्रणालियों में इसके विकास से शुरू होता है। इसमें इंग्लैंड में ‘इक्विटेबल जूरिस्डिक्शन’ के विकास और ‘जूडिकेचर एक्ट्स’ के प्रभाव पर चर्चा की गई है।

साम्या के सूत्र (Maxims of Equity): इस खंड का विशेष जोर साम्या के उन सूत्रों पर है, जो उपचारात्मक न्याय के मार्गदर्शक सिद्धांत हैं (जैसे: “”साम्या चाहने वाले को साम्या का पालन करना चाहिए””)

प्रमुख सिद्धांत: इसमें रूपांतरण (conversion), निर्वाचन (election), निष्पादन, परितोष (satisfaction), अदेम्पशन (ademption) और संपत्तियों के प्रशासन जैसे सिद्धांतों को स्पष्ट किया गया है।

सुरक्षात्मक प्रावधान: यह गलती, धोखाधड़ी, अनुचित प्रभाव, दंड और बंधक के विरुद्ध साम्यिक राहतों के साथ-साथ महिलाओं और अवयस्कों जैसे कमजोर समूहों के संरक्षण पर भी चर्चा करता है।

2. न्यास (Trusts)
दूसरा भाग न्यास की उत्पत्ति और भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 के माध्यम से इसके भारतीय कानून में समावेश को रेखांकित करता है।

प्रकृति और वर्गीकरण: यह न्यास के निर्माण, उसके प्रकारों और न्यासियों (Trustees) के कर्तव्यों, दायित्वों एवं अक्षमताओं की व्याख्या करता है।

लाभार्थियों के अधिकार: लाभार्थियों के अधिकार और उपचारों के साथ-साथ धर्मार्थ और धार्मिक न्यास, ‘साई-प्रे’ का सिद्धांत (Doctrine of Cy Pres) और वैश्वासिक संबंधों (fiduciary relationships) पर गहराई से चर्चा की गई है।

तुलनात्मक अध्ययन: इसमें भारतीय, अंग्रेजी, हिंदू और मुस्लिम कानून के बीच के अंतरों को स्पष्ट किया गया है।

3. विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम, 1963 (Specific Relief Act)
अंतिम भाग भारतीय कानून के तहत उपलब्ध साम्यिक उपचारों पर केंद्रित है:

संपत्ति की वसूली और संविदा का पालन: इसमें अचल और चल संपत्ति के कब्जे की वसूली और अनुबंधों के विनिर्दिष्ट पालन (Specific Performance) को कवर किया गया है।

उपचार के प्रकार: लेखपत्रों का परिशोधन (rectification), विखंडन (rescission), रद्दीकरण, घोषणात्मक डिक्री (declaratory decrees) और व्यादेश (Injunctions)।

न्यायिक व्याख्या: वैधानिक प्रावधानों और अदालती निर्णयों के संदर्भ में इन राहतों को देने या अस्वीकार करने के सिद्धांतों को समझाया गया है।

निष्कर्ष: यह पुस्तक ऐतिहासिक संदर्भ, सिद्धांतों, कानूनों और निर्णयज विधि (Case Law) का सटीक संतुलन बनाती है। तुलनात्मक दृष्टिकोण और व्यावहारिक अंतर्दृष्टि के साथ, यह अकादमिक अध्ययन और पेशेवर कानूनी अभ्यास के लिए एक व्यापक संसाधन है।”

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “साम्य, न्यास, न्यासवत् सम्बन्ध, बन्धक एवं विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम”

Your email address will not be published. Required fields are marked *

साम्य, न्यास, न्यासवत् सम्बन्ध, बन्धक एवं विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम
You're viewing: साम्य, न्यास, न्यासवत् सम्बन्ध, बन्धक एवं विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम 425.00
Add to cart
Select the fields to be shown. Others will be hidden. Drag and drop to rearrange the order.
  • Image
  • SKU
  • Rating
  • Price
  • Stock
  • Availability
  • Add to cart
  • Description
  • Content
  • Weight
  • Dimensions
  • Additional information
Click outside to hide the comparison bar
Compare