Description
डॉ. एन. वी. परांजपे द्वारा लिखित भारत का वैधानिक एवं संवैधानिक इतिहास भारत में विधिक और संवैधानिक संस्थाओं के विकास की ऐतिहासिक यात्रा का व्यवस्थित एवं विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत करती है। यह पुस्तक प्राचीन काल से लेकर आधुनिक भारतीय संविधान के निर्माण तक की विधिक व्यवस्थाओं, प्रशासनिक संरचनाओं और संवैधानिक प्रगति का विश्लेषण करती है।
पुस्तक में ब्रिटिश शासन के दौरान हुए महत्वपूर्ण विधायी और संवैधानिक परिवर्तनों का क्रमबद्ध विवरण दिया गया है। इसमें रेगुलेटिंग एक्ट, पिट्स इंडिया एक्ट, चार्टर एक्ट्स, भारतीय परिषद अधिनियमों तथा भारत सरकार अधिनियमों जैसे प्रमुख विधानों की पृष्ठभूमि, विशेषताएँ और उनके प्रभावों का स्पष्ट विवेचन किया गया है। साथ ही, इन अधिनियमों के माध्यम से भारतीय प्रशासनिक और न्यायिक व्यवस्था में आए परिवर्तनों को भी समझाया गया है।
यह पुस्तक भारतीय संविधान के निर्माण की प्रक्रिया, संविधान सभा की भूमिका तथा स्वतंत्रता के बाद स्थापित संवैधानिक ढांचे के मूल सिद्धांतों पर भी प्रकाश डालती है। इसमें न्यायपालिका, विधायिका और कार्यपालिका के विकास के साथ-साथ भारतीय विधिक प्रणाली के क्रमिक विकास को ऐतिहासिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया है।
सरल और स्पष्ट भाषा में लिखी गई यह पुस्तक विषय की जटिलताओं को सहज रूप में समझाती है। इसलिए यह विधि के विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों तथा विधिक पेशे से जुड़े व्यक्तियों के लिए एक महत्वपूर्ण और उपयोगी संदर्भ ग्रंथ है।




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