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भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 [किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 एवं अपराधी परिवीक्षा अधिनियम, 1958] [Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023]

950.00

EDITION: 12th Ed. (2025)
FORMAT: PAPERBACK
ISBN: 978-93-92140-66-2
LANGUAGE: HINDI
PAGES: 1084
PUBLISHER CODE: TBH/3
TBH/3.1
CATEGORY: TEXTBOOKS HINDI, CRIMINAL LAW, CRIMINAL PROCEDURE, BHARATIYA NAGARIK SURAKSHA SANHITA

EDITION: 12th Ed. (2025)
FORMAT: PAPERBACK
ISBN: 978-93-92140-66-2
LANGUAGE: HINDI
PAGES: 1084
PUBLISHER CODE: TBH/3
TBH/3.1
CATEGORY: TEXTBOOKS HINDI, CRIMINAL LAW, CRIMINAL PROCEDURE, BHARATIYA NAGARIK SURAKSHA SANHITA

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Description

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 डॉ. ना. वी. परांजपे द्वारा लिखित यह पुस्तक नवीनतम भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता पर विस्तृत टिप्पणी प्रदान करती है, जो पूर्ववर्ती दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 को प्रतिस्थापित करती है।

यह व्यापक पुस्तक इस नए कानून की विशेषताओं का स्पष्ट और विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करती है, जिससे धाराओं की बेहतर समझ सुनिश्चित होती है। इसमें प्रासंगिक न्यायिक निर्णयों के संदर्भ दिए गए हैं, जिससे व्यावहारिक समझ को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके।

पुस्तक में एक विशेष तुलनात्मक सारणी भी शामिल है, जो भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धाराओं को दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की संबंधित धाराओं के साथ दर्शाती है, जिससे दोनों के बीच के अंतर को आसानी से समझा जा सके।

सरल और स्पष्ट भाषा में लिखी गई यह पुस्तक छात्रों, न्यायिक अभ्यर्थियों और भारत में आपराधिक कानून के विकास में रुचि रखने वाले सभी व्यक्तियों के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन है। यह शैक्षणिक अध्ययन, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और विधिक अभ्यास के लिए अत्यंत उपयोगी है।

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The book Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 (Hindi) by Dr. N.V. Paranjape provides a comprehensive commentary on the Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023, which repeals the Code of Criminal Procedure, 1973.

This extensive book offers a clear and detailed analysis of the features of this new law, ensuring a better understanding of its provisions. It includes references to relevant judicial decisions, further strengthening practical comprehension.

The book also features a special comparative table that maps the provisions of the Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 with the corresponding sections of the Code of Criminal Procedure, 1973, making it easier to grasp the differences between the two.

Written in simple and clear language, this book is an essential resource for students, judicial aspirants, and anyone interested in the evolution of criminal law in India. It is extremely useful for academic study, competitive exam preparation, and legal practice.

\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\"डॉ. एन.वी. परांजपे की पुस्तक \\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\"\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\"कॉन्ट्रैक्ट–II, सेल ऑफ गुड्स एक्ट एवं पार्टनरशिप एक्ट\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\"\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\" (Contract–II, Sale of Goods Act and Partnership Act) एक व्यापक और व्यावहारिक पुस्तक है, जो विशिष्ट संविदाओं और संबद्ध विषयों पर केंद्रित है। इसमें विशेष रूप से वस्तु विक्रय अधिनियम, 1930 और भारतीय भागीदारी अधिनियम, 1932 को शामिल किया गया है, जो मूल रूप से अलग कानून के रूप में अधिनियमित होने से पहले भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 का हिस्सा थे।

यह पुस्तक तीन भागों में विभाजित है:

भाग I: इसमें विशिष्ट संविदाओं (specific contracts) जैसे कि क्षतिपूर्ति (indemnity), उपनिधान (bailment), गिरवी (pledge) और एजेंसी पर चर्चा की गई है।

भाग II: वस्तु विक्रय अधिनियम के प्रावधानों की व्याख्या करता है, जिसमें स्वामित्व, संपत्ति का हस्तांतरण, शर्तें (conditions), वारंटी और अनुबंध के उल्लंघन के लिए उपचार शामिल हैं।

भाग III: भारतीय भागीदारी अधिनियम पर चर्चा करता है, जिसमें भागीदारी का गठन, भागीदारों के अधिकार और कर्तव्य, विघटन (dissolution) और पंजीकरण को कवर किया गया है।

एक स्पष्ट और व्यवस्थित शैली में लिखी गई यह पुस्तक विधायी प्रावधानों को उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के महत्वपूर्ण निर्णयज विधि (केस लॉ) के साथ मिश्रित करती है, जिससे पाठकों के लिए यह समझना आसान हो जाता है कि कानूनी सिद्धांतों को व्यवहार में कैसे लागू किया जाता है।

यह पुस्तक कानून के छात्रों, शिक्षकों और पेशेवरों के साथ-साथ वाणिज्य, व्यवसाय प्रबंधन और कॉर्पोरेट क्षेत्र के लोगों की आवश्यकताओं को पूरा करने का लक्ष्य रखती है।\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\"
यह संस्करण बैंक गारंटी, प्रतिभूति (suretyship), उपनिधान (bailment) और भागीदारी की कानूनी स्थिति पर हाल के न्यायिक निर्णयों को शामिल करने के लिए पूरी तरह से संशोधित और अद्यतन किया गया है, जो पुस्तक को वर्तमान कानूनी विकास के लिए अत्यधिक प्रासंगिक बनाता है।

एक सरल और व्यवस्थित तरीके से लिखी गई यह पुस्तक पाठकों को जटिल कानूनी प्रावधानों को आसानी से समझने में मदद करने के लिए डिज़ाइन की गई है। यह विशेष रूप से L.L.B., L.L.M., वाणिज्य, व्यवसाय प्रशासन और प्रबंधन के छात्रों के साथ-साथ न्यायिक सेवाओं, सिविल सेवाओं और बैंकिंग परीक्षाओं की तैयारी करने वाले उम्मीदवारों के लिए उपयोगी है।\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\"

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